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बैंकिंग में स्विफ्ट क्या है? | What is SWIFT in banking? | GS Blog

यूक्रेन पर संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस के बीच बढ़ते तनाव के चलते रूस को स्विफ्ट (SWIFT) से बाहर किए जाने की संभावना है।

स्विफ्ट क्या है? | What is SWIFT?

  • SWIFT का पूरा नाम सोसाइटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन है।
  • यह एक मैसेजिंग नेटवर्क है जिसका इस्तेमाल वित्तीय लेन-देन से संबंधित सूचनाओं के त्वरित और दोषरहित आदान-प्रदान के लिए किया जाता है।
  • बैंक और बाकी वित्तीय संस्थाएं देश के बाहर भुगतान करने के लिए इसका इस्तेमाल करती हैं।
  • स्विफ्ट केवल एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो संदेश भेजता है और कोई प्रतिभूति या पैसा नहीं रखता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय वित्त और वाणिज्य का समर्थन करने के उद्देश्य से इसकी स्थापना 1973 में हुई थी।
  • इसका मुख्यालय बेल्जियम में है।
  • स्विफ्ट बेल्जियम के कानून के तहत एक सहकारी समिति है, जिसका प्रबंधन एक बोर्ड करता है।
  • 1977 में SWIFT के लाइव होने तक, 22 देशों के 518 संस्थान इसकी मैसेजिंग सेवाओं से जुड़े हुए थे।
  • वर्तमान में यह 200 से अधिक देशों और क्षेत्रों में 11,000 से अधिक बैंकिंग और प्रतिभूति संगठनों को जोड़ता है।
  • 1988 से यह केंद्रीय बैंकों और यूरोपियन सेंट्रल बैंक मिलकर स्विफ्ट की निगरानी करते हैं।
  • स्विफ्ट से पहले, अंतर्राष्ट्रीय फंड ट्रांसफर के लिए संदेश पुष्टीकरण का एकमात्र विश्वसनीय माध्यम ‘टेलेक्स’ था, लेकिन इसे धीमी गति, सुरक्षा चिंताओं आदि जैसे कई मुद्दों के कारण बंद कर दिया था।

स्विफ्ट कैसे काम करता है?

  • इस नेटवर्क के द्वारा हर सदस्य बैंक को एक खास अंतर्राष्ट्रीय कोड मिलता है।
  • इसे स्विफ्ट कोड या स्विफ्ट नंबर या बैंक आइडेंटिफ़ायर कोड (BIC) कहते हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय भुगतान की स्थिति में यही स्विफ्ट कोड बैंक विशेष की पहचान करता है।
  • लेन-देन के लिए इच्छुक एक देश का बैंक, दूसरे देश के बैंक को एक स्विफ्ट संदेश भेजेगा।
  • एक बार मैसेज प्राप्त हो जाने के और स्वीकृत हो जाने पर वह पैसा आवश्यक खाते में जमा कर दिया जाता है।
  • इसके माध्यम से बैंक भुगतान की प्रक्रिया को तेजी से पूरा कर पाते हैं।

रूस को हटाने के निहितार्थ

  • यदि किसी देश को सबसे अधिक भागीदारी वाले वित्तीय सुविधा मंच से बाहर रखा जाता है, तो वित्तीय संस्थानों के लिए बाहर पैसा भेजना लगभग असंभव हो जाएगा।
    • जिससे रूसी कंपनियों और उनके विदेशी ग्राहकों को झटका लगेगा।
  • उसकी विदेशी फंडिंग प्रभावित होगी।
    • जिससे यह पूरी तरह से घरेलू निवेशकों पर निर्भर हो जाएगा।
  • एक वैकल्पिक प्रणाली का निर्माण करना और उसे पहले से प्रचलित सिस्टम के साथ एकीकृत करना बोझिल और कठिन हो सकता है।
  • रूस, दूसरे विकल्प का भी प्रयोग कर सकता है; जैसे- चीन का स्विफ्ट नेटवर्क ‘क्रॉस बॉर्डर इंटर बैंक पेमेंट्स सिस्टम’।
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