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भारतीय संविधान के प्रमुख संशोधन

प्रमुख संविधान संशोधन

हमारे संविधान में अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन की व्यवस्था की गई है। इस संविधान संशोधन के अनुच्छेद को संविधान में रखने का उद्देश्य यही था कि समय तथा परिस्थितियों के साथ संविधान में बदलाव किये जा सकें। संशोधन का यह तरीका हमारे संविधान में दक्षिण अफ्रीका से लिया गया है।

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समय-समय पर यह संशोधन संसद के द्वारा संविधान में किये जाते हैं, एवं कुछ कानूनों में राज्यों की विधानसभाओं या विधानमण्डल की अनुमति की भी आवश्यकता पड़ती है।

26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद से अभी तक जो भी प्रमुख संविधान संशोधन हुए हैं, उन्हें हम निम्न प्रकार पढ़ सकते हैं-

प्रथम संविधान संशोधन 1951

  • मूल संविधान में 8 अनुसूचियाँ थीं तथा प्रथम संशोधन में नौवीं अनुसूची जोड़ी गई। नौवीं अनुसूची में ऐसे विषयों को रखा गया जिन्हें न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती
  • जमींदारी प्रथा को समाप्त करने के उद्देश्य से भूमि सुधार कानून को भी पहले संविधान संशोधन से संविधान में जोड़ा गया।

7 वाँ संविधान संशोधन 1956

भारत में राज्यों का पुनर्गठन किया गया था तथा 1956 में इसकी report आई। इससे पहले राज्यों को क, ख, ग, घ के 4 वर्गों (groups) में बांटा गया था, 1956 में संविधान संशोधन कर के भारत में 14 राज्य तथा 6 केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए।

देश में राज्यों की संख्या बढ़ने लगी तो दो या दो से अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय के प्रावधान की व्यवस्था भी इस संशोधन में की गई।

31 वाँ संविधान संशोधन 1973

  • इस 31 वें संविधान संशोधन से लोकसभा की सीटों को 525 से बढ़ाकर 545 किया गया, तथा वर्तमान में भी यह 545 ही है।
  • 545 में से 543 पर सदस्य चुनाव द्वारा आते हैं तथा 2 सीटें आंग्ल-भारतीयों (Anglo-Indians) के लिए आरक्षित हैं।
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36 वाँ संविधान संशोधन 1975

  • 1975 के इस संविधान संशोधन से सिक्किम को भारत के राज्यों में शामिल किया गया, 22 वें राज्य के रूप में

42 वाँ संविधान संशोधन 1976

इस संविधान संशोधन को संविधान का सबसे महत्वपूर्ण संशोधन कहा जाता है, और यह जिन परिस्थितियों में किया गया वे इसे और भी महत्वपूर्ण बनाती हैं। 1976 में आपातकाल के समय इंदिरा सरकार द्वारा यह संशोधन लाया गया। इस संशोधन से संविधान में इतने अधिक बदलाव किये गए कि इस संशोधन को लघु संविधान (mini constitution) तथा आपातकाल का तोहफा आदि नामों से भी जाना जाता है।

कुछ नए नियमों को जोड़ा गया तो कुछ में महत्वपूर्ण बदलाव किये गए। इन्हें हम निम्न प्रकार समझ सकते हैं-

  • मूल कर्तव्यों को जोड़ा गया- मूल संविधान में मूल कर्तव्य नहीं थे इन्हें 42 वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा संविधान के भाग 4(क), अनुच्छेद 51(क) में जोड़ा गया।
  • प्रस्तावना में तीन शब्द जोड़े गए- समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, अखंडता; ये तीनों शब्द इस संशोधन द्वारा संविधान की प्रस्तावना में जोड़े गए। जोकि मूल संविधान में नहीं थे।
  • राष्ट्रपति कैबिनेट की सलाह मानने के लिए बाध्य– इस संशोधन से पहले तक राष्ट्रपति कैबिनेट की किसी भी सलाह को मानने के लिए बाध्य नहीं होते थे, परंतु इस संशोधन के होने से राष्ट्रपति को कैबिनेट की सलाह मानने के लिए बाध्य कर दिया गया।
  • लोकसभा व विधानसभा का कार्यकाल- केंद्र में लोकसभा एवं राज्यों में विधानसभा जिनका कार्यकाल 5 वर्ष हुआ करता था उसे इस संशोधन से बढ़ाकर 6 वर्ष कर दिया गया।
  • शिक्षा, वन, वन्य जीव, नाप-तोल जैसे विषयों को समवर्ती सूची में जोड़ा गया। जो कि इससे पहले राज्य सूची के विषय थे।
  • संसद एवं विधानमण्डल के लिए कोरम व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया। 42 वें संविधान संशोधन से कोरम व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया; अर्थात् सदन में कितने भी सदस्य मौजूद हों सभा को मान्य किया जाएगा तथा बैठक में लिया गया निर्णय भी मान्य होगा।

44 वाँ संविधान संशोधन 1978

इस संविधान संशोधन में इंदिरा सरकार द्वारा लाए गए बदलावों को बदलने की कोशिश की गयी। जिन्हें हम निम्न प्रकार समझ सकते हैं-

  • इस संशोधन के द्वारा लोकसभा और विधानसभा के कार्यकाल को फिर से 5 वर्ष कर दिया गया।
  • राष्ट्रपति किसी प्रस्ताव को कैबिनेट को पुनर्विचार करने के लिए भेज सकता है। लेकिन यही प्रस्ताव राष्ट्रपति के पास फिर से भेज जाता है तो राष्ट्रपति उस पर हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य होंगे।
  • कोरम व्यवस्था को भी पहले की ही तरह फिर से लागू किया गया। वर्तमान में भी यह व्यवस्था है।
  • संविधान के अनुच्छेद 352 में आपातकाल की स्थिति को बताया गया है, इसी अनुच्छेद में आंतरिक अशान्ति के स्थान पर सशस्त्र विद्रोह किया गया।
  • इस संशोधन यह भी कहा गया कि अनुच्छेद 20 और 21 को राष्ट्रीय आपात की स्थिति में भी निलंबित नहीं किया जा सकेगा
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52 वाँ संविधान संशोधन 1985

इस संविधान संशोधन द्वारा दसवीं अनुसूची को संविधान में जोड़ा गया। इस अनुसूची. में दल-बदल के संबंध में प्रावधान जोड़े गए।

56 वाँ संविधान संशोधन 1987

56 वें संशोधन से गोवा को भारत के 25 वें राज्य के रूप में मान्यता दी गयी।

61 वाँ संविधान संशोधन 1989

वयस्क मताधिकार की न्यूनतम आयु को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया। जोकि वर्तमान में भी 18 वर्ष ही है।

69 वाँ संविधान संशोधन 1991

दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का दर्जा दिया गया।

73 वाँ संविधान संशोधन 1992

  • पंचायती व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा दिया गया।
  • 11 वीं अनुसूची को संविधान में जोड़ा गया, तथा इसमें पंचायतों के 29 कार्यक्षेत्र जोड़े गए।
  • संविधान में भाग 9 को जोड़ा गया।

74 वाँ संविधान संशोधन 1992 

  • शहरी स्थानीय निकाय जैसे- नगर पंचायत, नगर परिषद्, नगर पालिका आदि को वैधानिक दर्जा दिया गया।
  • 12 वीं अनुसूची को संविधान में जोड़ा गया और 18 कार्यक्षेत्रों को इसमें जोड़ा गया।
  • भाग 9(क) को संविधान में जोड़ा गया।
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लोकतंत्र

84 वाँ संविधान संशोधन 2001

इस संशोधन में लोकसभा एवं विधानसभा की सीटों की संख्या को 2026 तक के लिए निश्चित कर दिया गया।

86 वाँ संविधान संशोधन 2002

  • अनुच्छेद 21(क) के तहत 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए निशुल्क शिक्षा का प्रावधान इस संशोधन से जोड़ा गया।
  • अनुच्छेद 45 में 0 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए सरकार उनके पोषण, शिक्षा आदि का ध्यान रखेगी।
  • अनुच्छेद 51(क) के तहत 11 वें मौलिक कर्तव्य को जोड़ा गया

91 वाँ संविधान संशोधन 2003

इस संविधान संशोधन में यह प्रावधान किया गया की किसी भी निम्न सदन (केंद्र में लोकसभा व राज्यों में विधानसभा) के केवल 15% सदस्य ही मंत्रीपरिषद् का अंग बन सकते हैं। तथा राज्यों में न्यूनतम 12 मंत्री इसके सदस्य बनाए जाने चाहिए।

92 वाँ संविधान संशोधन 2003

8 वीं अनुसूची में 4 भाषाएं और जोड़ी गयीं– बोडो, डोंगरी, मैथली, संथाली।

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100 वाँ संविधान संशोधन 2015

इस संविधान संशोधन के तहत भारत ने बांग्लादेश के साथ भूमि हस्तांतरण समझौता किया जिसमें भारत ने बांग्लादेश को 111 गाँव सौंपे तथा 51 गाँव बांग्लादेश ने भारत को दिए

101 वाँ संविधान संशोधन 2016 

GST बिल जिसे वस्तुएं एवं सेवा कर भी कहते हैं, को हाल ही में 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया।

महत्वपूर्ण तथ्य

  1. कोरम– कोरम को गणपूर्ति भी कहा जाता है। लोकसभा, राज्यसभा या विधान सभा की कार्यवाही तभी मान्य होगी, जब सदन में कम से कम 1/10 सदस्य मौजूद हों। इस संख्या को ही कोरम कहा जाता है।
  2. 1977 के चुनावों में इंदिरा गांधी के हारने के बाद जनता सरकार अस्तित्व में आई; तथा पहली बार मोरारजी देसाई के नेतृत्व में गैर-कॉंग्रेसी सरकार बनी, तब 44 वाँ संविधान संशोधन किया गया।
  3. गोवा के बाद 2000 ईस्वी में 3 राज्य और बने थे- छतीसगढ़, उत्तराखंड व झारखंड। इस प्रकार सन् 2000 में भारत में 28 राज्य हो गए थे। उसके बाद 2 जून 2014 को भारत में एक और राज्य बना तेलंगाना तथा भारत में वर्तमान में 29 राज्य हैं।
  4. दिल्ली और पुडुचेरी ही ऐसे दो केंद्र शासित प्रदेश हैं जहाँ विधानसभा की व्यवस्था है।
  5. 11 वें मौलिक कर्तव्य में यह कहा गया कि अभिभावक का यह कर्तव्य होगा की वह अपने 6 से 14 वर्ष की आयु वाले बच्चों को विद्यालय भेजें।
  6. बिहार राज्य से केवल मैथली ही ऐसी भाषा है जोकि संवैधानिक दर्ज प्राप्त किये हुए है।
  7. वर्तमान में जनवरी 2020 तक हमारे संविधान में 104 संविधान संशोधन हो चुके हैं।
  8. अनुच्छेद 370 को लेकर रामगोपाल यादव ने कहा कि यह संविधान संशोधन है और इसे प्रस्ताव के जरिए नहीं हटाया जा सकता। धारा 370 के अंदर ही इसका प्रावधान है. धारा 373 में लिखा है कि राष्ट्रपति पब्लिक नोटिस के तहत इसे लागू और हटा सकते हैं, अमित शाह ने कहा कि राष्ट्रपति को पब्लिक नोटिफिकेशन से इसे हटाने के अधिकार है जिसके तहत संविधानिक आदेश जारी करते हुए पब्लिक नोटिफिकेशन निकाला गया।
  9. राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ही तीन तलाक बिल कानून बना 19 सितंबर 2018 से लागू।
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