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कार्यपालिका | विधायिका | न्यायपालिका | Executive | Legislature | Judiciary

कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका

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एक लंबी गुलामी की अवस्था का सामना करने के बाद हमारे भारत देश को स्वतंत्रता का स्वाद चखने को मिला। स्वतंत्रता के बाद हमारे देश के लोगों को जरूरत थी, एक ऐसी व्यवस्था की जिसमें वो विश्वास कर सके जिसे आसानी से अपना सकें।

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सर्वोच्च न्यायलय (Supreme Court)

कार्यपालिका विधायिका न्यायपालिका का basic ढांचा हम निम्न प्रकार समझ सकते हैं-

विधि अर्थात् कानून; किसी भी देश में कानून बनाने का कार्य विधायिका का होता है। सबसे पहले विधेयक जिसे आसान शब्दों में हम Bill कहते हैं। विधेयक बनाने का कार्य विधायिका का होता है।
उसी विधेयक को कानून के रूप में लागू करने का कार्य कार्यपालिका करती है।
तथा कानून का पालन नहीं करने पर उसे दंडित करने की शक्ति न्यायपालिका के पास है।

जैसा की हम जानते हैं, भारत में दो स्तर पर सरकार बनाई जाती है- केंद्र स्तर पर तथा राज्य स्तर पर। यहाँ सबसे पहले हम कार्यपालिका के इन्हीं कार्यों की चर्चा करेंगे कि कार्यपालिका दोनों स्तर पर कार्य करती है?

कार्यपालिका के अंग-

केंद्र स्तर पर कार्यपालिका के अंग

  • केंद्र तथा राज्य दोनों स्तर पर कार्यपालिका का प्रमुख राष्ट्रपति को माना जाता है।
  • दूसरे स्थान पर उपराष्ट्रपति को माना जाता है।
  • कार्यपालिका में तीसरे स्थान पर प्रधानमंत्री को माना जाता है। प्रधानमंत्री को वास्तविक प्रमुख भी कहा जाता है।
  • मंत्रीपरिषद् भी कार्यपालिका का ही हिस्सा होता है। इसमें 3 प्रकार के मंत्री होते हैं- कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री तथा उप-मंत्री।

राज्य स्तर पर कार्यपालिका के अंग

  • राज्य स्तर पर प्रमुख राज्यपाल होता है।
  • दूसरे स्थान पर मुख्यमंत्री को राज्य का प्रमुख माना जाता है।
  • यहाँ राज्य स्तर पर भी मंत्रीपरिषद् कार्यपालिका का हिस्सा होता है।

स्थाई व अस्थाई सदस्य

कार्यपालिका के सदस्यों को हम स्थाई तथा अस्थाई दो भागों में भी बाँट कर देख सकते हैं।

  1. स्थाई सदस्यों में अधिकारी होते हैं, जिन्हें 60 या उससे अधिक आयु तक के लिए किसी पद पर नियुक्त किया जाता है। इसमें सभी सरकारी अधिकारी जैसे सचिव आते हैं।
  2. अस्थाई सदस्यों में मंत्रियों को रखा जाता है जोकि 5 साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं। इसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा अन्य सभी मंत्री आते हैं।

विधायिका के अंग

विधायिका में भी विधेयक बनाने का कार्य केंद तथा राज्य दो स्तर पर होता है।

केंद्र स्तर पर कानून बनाने का कार्य संसद करती है। 

संसद के तीन अंग होते हैं-

  • लोकसभा
  • राज्यसभा
  • राष्ट्रपति
राज्य स्तर पर कानून बनाने कार्य विधानमण्डल करता है। 

विधानमण्डल में भी दो अंग होते हैं-

  • विधानसभा
  • विधानपरिषद्

न्यायपालिका

कानून व्यवस्था को व्यवस्थित (सही तरह से) रूप से चलाने के लिए या हम कह सकते हैं की कानून का उल्लंघन करने पर दंड या सही सजा देने के लिए न्यायपालिका का गठन किया गया है।

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राजस्थान-उच्च-न्यायालय
हमारे देश में न्यायपालिका को स्वतंत्र रखा गया है तथा एकीकृत रूप में ढाला गया है। जिसमें
  1. सबसे उच्च स्तर पर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court)
  2. दूसरे स्तर पर उच्चतर न्यायालय (High Court)
  3. तीसरे स्तर पर जिला या सत्र न्यायालय (District Court)

इसी तरह यह एक क्रम में शृंखला है, जिसे हम न्यायपालिका कहते हैं। इसी तरह यदि किसी न्यायालय के फैसले को हम नहीं मानते तो हम उससे ऊपरी न्यायालय में अपील कर सकते हैं।

हमारी न्यायपालिका स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से कार्य करती है।

यहाँ हमारा यह जानना भी जरूरी है कि संविधान के अनुच्छेद 50 में कार्यपालिका और न्यायपालिका को अलग रखने को कहा गया है। क्यूंकि विधायिका और कार्यपालिका आपस में मिल-जुल कर कार्य करते हैं। तथा निष्पक्ष न्याय करने के लिए यह आवश्यक है।

जैसा कि हम संविधान में भारत को एक लोक कल्याणकारी राज्य बनाने की बात करते हैं। वह इस प्रकार ही संभव होता दिखाई देता है।

छोटी-छोटी मगर बड़े काम की बातें-

  • कार्यपालिका, विधायिका तथा न्यायपालिका तीनों ही हमारे देश की राजव्यवस्था की रीढ़ हैं।
  • जैसा की हम सब जानते हैं, हमारी भारतीय राजव्यवस्था में पद तथा शक्ति दोनों ही राष्ट्रपति के पास हैं, परंतु अपनी इन शक्तियों का प्रयोग राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सहायता से करते हैं। यही कारण है कि राष्ट्रपति को नामित प्रमुख तथा प्रधानमन्त्री को वास्तविक प्रमुख कहा जाता है।
  • हमने अनुसूचियों में पढ़ा था कि सूचियां तीन प्रकार की होती हैं- केंद्र सूची, राज्य सूची व समवर्ती सूची।
  • जिनमें केंद्र सूची पर कानून केंद्र बनाता है, तथा राज्य सूची पर कानून राज्य बनाता है। वहीं समवर्ती सूची पर कानून केंद्र और राज्य दोनों बनाते हैं।
  • लोकसभा तथा राज्यसभा के सदस्यों को सांसद (Member of Parliament या MP) कहा जाता है।
  • विधानमण्डल के सदस्य विधायक (Member of Legislative या MLA) कहलाते हैं।
  • विधानसभा सभी राज्यों के लिए बनाना जरूरी होता है। वर्तमान में भारत के सभी 29 राज्यों में विधानसभाएं हैं तथा 2 केंद्र शासित प्रदेशों दिल्ली व पुडुचेरी में भी विधानसभा हैं।
  • जबकि विधानपरिषद् को बनाने या ना बनाने का निर्णय राज्य का होता है। वर्तमान में विधानपरिषद् देश के 6 राज्यों -आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में विधानपरिषद् है, केन्द्रशासित प्रदेश बनने से पहले जम्मू-कश्मीर में भी विधानपरिषद् थी।
  • एक समय पर एक व्यक्ति कार्यपालिका व विधायिका दोनों का अंग हो सकता है। जैसे प्रधानमंत्री लोकसभा का अंग होते हुए विधायिका का हिस्सा होते हैं तथा प्रधानमंत्री के रूप में वह कार्यपालिका का भी हिस्सा होते हैं।

इसे हम ऐसे समझ सकते हैं कि जब वह मंत्री संसद में कानून (Bill) पेश करने जाता है तो वह विधायिका का अंग होता है। वहीं जब वह अपने मंत्रालय में कार्य कर रहा होता है, तब वह कार्यपालिका के अंग के रूप में कार्य करता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
  • केंद्र स्तर पर सर्वोच्च न्यायालय सबसे बड़ा है जबकि राज्य स्तर पर उच्चतर न्यायालय सबसे बड़ा होता है।

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Comments (9) on “कार्यपालिका | विधायिका | न्यायपालिका | Executive | Legislature | Judiciary”

  1. अत्यंत सरल और आसान भाषा में विषय को सारगर्भित रूप से प्रस्तुत करने के लिए जी.एस. ब्लॉग के सभी सदस्यों को साधुवाद.

    1. आपके ऐसे ही comments se हमें कार्य करने की प्रेरणा मिलती है,
      धन्यवाद

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