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दावोस एजेंडा 2022 | Davos Agenda 2022 | GS Blog

दावोस एजेंडा 2022

  • दावोस सम्मेलन वर्चुअल मोड में शुरू हो चुका है।
  • इसी कड़ी में 17 जनवरी को विश्व आर्थिक मंच (WEF) दावोस एजेंडा 2022 में अपने सम्बोधन के दौरान, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (जिन्होंने 1 जनवरी को संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के रुप में अपना दूसरा पाँच वर्षीय कार्यकाल शुरू किया है) ने जलवायु परिवर्तन, कोरोनावायरस (COVID-19) और अन्य संकटों के बीच विकासशील देशों के लिए मदद के लिए तत्काल जरूरी कार्यों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
  • दावोस एजेंडा 2022 के पहले दिन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शिखर सम्मेलन को संबोधित किया।
  • इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने नई विश्व व्यवस्था में बहुपक्षीय की प्रसंगिकता और नई उभरती चुनौतियों सहित कई अन्य मुद्दों पर बात की।
  • इसके अलावा, जिनपिंग ने उन चुनौतियों पर, विशेष रुप से COVID-19 महामारी के आलोक में चर्चा की, जिसका दुनिया सामना कर रही है।
  • उन्होंने कहा कि वर्तमान में विद्यमान कोविड चुनौती के संदर्भ में, हमें वैश्विक आर्थिक सुधार के लिए नए रास्ते तलाशने की जरूरत है साथ ही Eco-Globalization वर्तमान समय की मांग है।
  • यह सम्मेलन ‘द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड’ थीम पर आयोजित किया जा रहा है।

दावोस फोरम क्या है? | What is Davos Forum?

  • विश्व आर्थिक मंच को अक्सर दावोस फोरम के नाम से भी जाना जाता है।
  • 1971 में शुरू हुआ यह फोरम, पारंपरिक रुप से वैश्विक वाणिज्य, आर्थिक विकास, महत्त्वपूर्ण राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों पर चर्चा के लिए दावोस (स्विट्जरलैंड) में एक वार्षिक सम्मेलन के रुप में आयोजित किया जाता है।
  • इस वर्ष दावोस फोरम का आयोजन 17 से 21 जनवरी 2022 तक किया जा रहा है।
  • WEF की दावोस एजेंडा वर्चुअल समिट में विश्वभर के प्रमुख नेता, महत्त्वपूर्ण संस्थान व संगठन प्रमुख, विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे और उनसे निपटने के उपायों के तरीकों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।
  • गौरतलब है कि WEF सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, कॉर्पोरेट जगत, नागरिक समाज और शिक्षा जगत के राष्ट्राध्यक्षों, नेताओं, नीति निर्माताओं, शीर्ष कार्यपालकों, उद्योगपतियों, मीडिया हस्तियों आदि को एक साथ ला कर सामूहिक रुप से महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करके समाधान उपायों पर बात करने के लिए एक वैश्विक मंच है।
  • साथ ही यह विभिन्न क्षेत्रों में निर्णयों को प्रभावित करता है, विशेष रुप से वैश्विक महत्त्व के मुद्दों जैसे गरीबी, सामाजिक चुनौतियाँ, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक आर्थिक सुधार आदि।

दावोस एजेंडा 2022 | Davos Agenda 2022

  • इस एजेंडे में WEF वैश्विक चिंता के कुछ अहम पहलुओं जैसे, खासतौर से COVID-19 और जलवायु परिवर्तन की चिंताओं को संबोधित करने में इस फोरम के विकास और प्रभाव में तेजी लाने तथा शिक्षा और वैश्विक प्रोद्योगिकी में आड़े आ रही इन चुनौतियों को दूर करने के लिए समाधान पर जोर दे रहा है।
  • इसका उद्देश्य विभिन्न समूहों, परियोजनाओं और इच्छुक व्यक्तियों को एक साथ लाकर नए विचारों और आविष्कारों को प्रोत्साहित करने के लिए सहयोग हेतु एक मंच तैयार करना है।
  • इसके तहत, महामारी के अगले चरण तथा टीकों के महत्त्व के मद्देनजर वैश्विक सहयोग चर्चा का केंद्र रहा।
  • दावोस एजेंडा इस चुनौतीपूर्ण संदर्भ में आवश्यक सिद्धांतों, नीतियों और भागीदार को आकार देने के लिए वैश्विक नेताओं की एक अग्रणी पहल है।
  • इन्हीं मुद्दों को ध्यान में रखते हुए फोरम आगामी समय की अनिवार्यताओं पर और बैठकों की एक शृंखला की मेजबानी करेगा जिसके जरिए विभिन्न नेताओं को साथ लाकर समाधान खोजे जा सकेंगे।

इस वर्ष के प्रमुख मुद्दे

  • इस शिखर सम्मेलन में चिंता के तीन मुख्य क्षेत्र क्लाइमेट एक्शन, महामारी से उबरना तथा आर्थिक एवं सामाजिक लचीलापन हैं।
  • इसके अलावा, महत्त्वपूर्ण सामूहिक चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए महत्त्वकांक्षी उच्च स्तरीय नेतृत्व पैनल को संबोधित करना।
  • साथ ही नेट-ज़ीरो उत्सर्जन, प्रकृति-सकारात्मक समाधानों के आर्थिक अवसर सुनिश्चित करना, साइबर लचीलापन, वैश्विक मूल्य शृंखलाओं को मजबूत करना, मानवीय निवेश के जरिए कमजोर अर्थव्यवस्थाओं को सहायता, वैक्सीन निर्माण अंतर को पाटना तथा किसी अन्य महामारी की तैयारी के डेटा का उचित उपयोग करना शामिल हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र ने भी वैश्विक वित्तीय प्रणाली में सुधार के लिए उद्योग जगत से विकासशील देशों का समर्थन करने की अपील की है।
  • जैसा कि वर्तमान स्थिति बताती है कि विकासशील और कम आय वाले देशों की न सिर्फ COVID-19 टीकों तक अधिक पहुँच बनाने की आवश्यकता है बल्कि उन्हें जलवायु संकट और इससे संबंधित परिणामों से निपटने के लिए भी उचित समर्थन व सहायता की दरकार है।
  • गौरतलब है कि हाल ही में जारी ऑक्सफैम की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के कुछ सबसे अमीर लोगों की संपत्ति में इजाफा हुआ है जो चर्चा का मुद्दा बना हुआ है।

दावोस एजेंडा का महत्त्व | Importance of Davos Agenda

  • इसके जरिए वैश्विक स्तर पर अलग-अलग राष्ट्रों/संगठनों आदि के प्रमुख अपने अद्वितीय, विशिष्ट और स्थानीय अनुभवों के आधार पर अपने दृष्टिकोण और संभावित समाधान साझा करते हैं।
  • दूसरी ओर, बीते करीब दो सालों से COVID-19 के कारण वैश्विक समस्याओं में हुए इजाफे से विभिन्न अर्थव्यवस्थाएं, समाज और संगठन इस वायरस के अप्रत्याशित नुकसान से जूझ रहे हैं।
  • ऐसे में दावोस एजेंडा दुनिया के सबसे महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण, विचारों और योजनाओं पर चर्चा करने के लिए विभिन्न राज्यों/ सरकारों/ प्रमुखों/ उद्योगपतियों/ अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों व नागरिक समाज को एक साथ लाकर इन मुद्दों से निपटने में अहम भूमिका निभाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सम्बोधन | Prime Minister Narendra Modi’s speech

  1. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दावोस एजेंडा 2022 वर्चुअल इवेंट में बोलते हुए, पीएम मोदी ने ब्लॉकचेन-समर्थित डिजिटल मुद्राओं के लिए नीति-निर्माण के संबंध में सामूहिक और सिंक्रोनाइज़ वैश्विक कार्यवाई का आह्वान किया।
  2. उन्होंने कोविड-19, जलवायु परिवर्तन, क्रिप्टोकरेंसी, महंगाई और आपूर्ति शृंखला से जुड़ी चुनौतियों जैसे कुछ महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर बात करते हुए कहा कि इनके खिलाफ कोई देश अकेला नहीं लड़ सकता है।
  3. साथ ही उन्होंने कहा कि भारत ‘Ease of doing Business’ को बढ़ावा दे रहा है, एक बड़ी ताकत और जोश के साथ आगे बढ़ रहा है, आत्मनिर्भरता के रास्ते पर चल रहा है, निवेश और उत्पादन को प्रोत्साहित कर रहा है आदि।
  4. अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने ‘P-3’ दृष्टिकोण का प्रस्ताव रखा, जिसका अर्थ है-“pro-planet-people”
  5. उन्होंने वैश्विक व्यवस्था में बदलाव के साथ-साथ बढ़ती चुनौतियों, जिनमें आपूर्ति-शृंखला में व्यवधान, मुद्रास्फीति, जलवायु परिवर्तन और क्रिप्टोकरेंसी शामिल हैं, पर भी ध्यान आकृष्ट किया।

उभरती वैश्विक चुनौतियों और भारत के कदम | Emerging Global Challenges and India’s Steps

  • सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक कार्बन उपयोग में भारत का योगदान 5% है लेकिन गैर-नवीकरणीय ऊर्जा को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की हमारी प्रतिबद्धता 100% है।
  • इसके अलावा भारत ‘वैश्विक भलाई’ के अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए 2070 तक नेट-ज़ीरो लक्ष्य लक्ष्य को हासिल करने को प्रतिबद्ध है।
  • भारत सरकार द्वारा की गई कई पहलों के कारण भारत अब “नया, आकर्षक” निवेश गंतव्य बन गया है जो औद्योगिक समुदाय को आकर्षित करता है।
  • भारत ने 4.4 अरब से अधिक लेन-देन के साथ डिजिटल भुगतान को UPI के साथ अपनी ताकत बना लिया है।
  • देश मन उभरते कारोबारी क्षेत्रों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारत में 50 लख से अधिक सॉफ्टवेयर डेवलपर काम कर रहे हैं।
  • इसके अलावा, भारत यूनिकॉर्न के मामले में दुनिया का तीसरा देश है जहाँ पिछले 6 महीने 10 हजार से ज्यादा स्टार्टअप रजिस्टर हुए हैं।
  • वैक्सीन निर्माण में आगे बढ़ते हुए भारतीय दवा कंपनियां वैश्विक टीकाकरण समस्याओं के मद्देनजर आवश्यक विभीन टीकों की वैश्विक मांग की 50% से अधिक की आपूर्ति करती हैं।

निष्कर्ष | Conclusion

  • पहली और सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि कोई Planet-Bनहीं है ऐसे में अपने ग्रह की सुरक्षा को बेहद जरूरी और अंतिम विकल्प कहा जा सकता है।
  • हमारी दुनिया के लिए एक नया शासन मॉडल बेहद जरूरी है, तो ऐसे में व्यापार और वित्त जगत को प्राथमिकता देने के बजाय समाज और प्रकृति की प्रधानता पर ध्यान केंद्रित करने की दरकार की है।
  • इसका मतलब है कि जब COVID-19 महामारी समाप्त हो जाएगी, तो दुनिया को एक नए शासन मॉडल की जरूरत होगी जो कई मौलिक मामलों में अपने पूर्ववर्तियों से अलग हो।
  • इसके अलावा हमारे संस्थान और हमारे नेताओं दोनों का इस उद्देश्य के अनुरूप व उपयुक्त न होना भी एक बड़ी समस्या है जिस पर ध्यान देने की जरूरत है।
  • साथ ही चौथी औद्योगिक क्रांति और जलवायु परिवर्तन जिस प्रकार हमारे वर्तमान जीवन को प्रभावित कर रहे हैं, ऐसे में सार्वजनिक और कॉर्पोरेट प्रशासन स्तर पर भी बेहतर व आवश्यक बदलाव लाने की कोशिश होनी चाहिए।
  • उम्मीद है कि 2022 में कोविड-19 महामारी और इससे पैदा हुए असंख्य संकट आखिरकार कम हो जाएं किंतु उस स्थिति में भी कुछ नई चुनौतियाँ जैसे क्लाइमेट एक्शन की विफलता से लेकर सामाजिक एकता की कमी जैसे मुद्दे मौजूद हैं जिन्हें संबोधित करने के लिए वैश्विक स्तर एक अलग शासन मॉडल अपनाने की आवश्यकता होगी।
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